मैं उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ !!
मंजिल भी मैं हूँ, मंजिल की राह भी मैं हूँ,
मैं खुद की खोज के पथ पर हूँ।
क्योंकि मालूम है मुझे मंजिल मेरी,
इसीलिए उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ।
मुझे प्रसिद्धि की चाहत नहीं, बदनामी का भय नहीं।
मुझे प्रसिद्धि की चाहत नहीं,
और बदनामी का भय नहीं।
मैं तो उन प्रसिद्ध दीवारों की, बुनियाद का पत्थर हूँ।
क्योंकि मालूम है मुझे मंजिल मेरी,
इसीलिए उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ।
मुझे रोकेगा कोई, मुझे टोकेगा कोई,
मेरे बढ़ते कदमों को पीछे खींचेगा कोई,
लेकिन मैं अपनी राह में रुकुँगा नहीं, झुकुंगा नहीं,
क्योंकि मैं उस मुकाम को पाने के लिए तत्पर हूँ।
हाँ मालूम है मुझे मंजिल मेरी,
और मैं उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ।
- कृष्णांश
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