ना रहा कोई लौह पुरुष !!

ना रहा कोई लौह पुरुष जो क्षेत्रवाद फिर मिटा सके,
व्यक्तियों की सोच को कोई आज फिर बदल सके।

पंजाब गुण गाए अपने, हरियाणा किसी से कम नहीं,
और यूपी वाले तो अनपढ़ हैं, इनकी कोई औकात नहीं।
और जहाँ जन्म लिया चाणक्य ने!
जहाँ जन्म लिया चाणक्य ने, जहाँ कुँवर से वीर हुए,
उस बिहार के लोगों का भी आज कहीं सम्मान नहीं।

अरे भारत का ना ध्यान किसी को,
भारत का ना ध्यान किसी को, आपस में सब लड़ रहे,
ना रहा कोई लौह पुरुष जो क्षेत्रवाद फिर मिटा सके।

कहे राजपूत राणा हमारे, कहे मराठा शिवाजी हमारे,
फिर कौन कहेगा इन दोनों को भारत माँ के पूत दुलारे?
माना दोनों ने शान अपने, क्षेत्रों की खूब बढ़ाई थी,
पर स्वाभिमान भारत का बचाएँ, यही कसम तो खाई थी!

अरे पूर्वजों को देखो अपने,
पूर्वजों को देखो अपने, तुम उनकी भांति ना बन सके,
ना रहा कोई लौह पुरुष जो क्षेत्रवाद फिर मिटा सके।

अनेक प्रांत हैं, अनेक क्षेत्र हैं, सबकी अपनी क्षमता है,
भारत माँ के वीर पुत्र सब, सबको मिलती ममता है।
जब माँ के सामने पुत्र लड़ें तब माँ का कलेजा रोता है,
आपस में फिर ना लड़ें ये, इतना प्रेम तो बनता है।

क्षेत्रवाद को छोड़कर हम भारत वासी बन सकें,
काम ऐसा सब करो कि लौह पुरुष सब बन सकें।

- कृष्णांश

Follow Us On :-


हमारी अन्य वेबसाइट :-


Comments

Popular posts from this blog

अगर हिन्दू राष्ट्र बनाना है तो!

मैं उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ !!