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Showing posts from May, 2023

ना रहा कोई लौह पुरुष !!

ना रहा कोई लौह पुरुष जो क्षेत्रवाद फिर मिटा सके, व्यक्तियों की सोच को कोई आज फिर बदल सके। पंजाब गुण गाए अपने, हरियाणा किसी से कम नहीं, और यूपी वाले तो अनपढ़ हैं, इनकी कोई औकात नहीं। और जहाँ जन्म लिया चाणक्य ने! जहाँ जन्म लिया चाणक्य ने, जहाँ कुँवर से वीर हुए, उस बिहार के लोगों का भी आज कहीं सम्मान नहीं। अरे भारत का ना ध्यान किसी को, भारत का ना ध्यान किसी को, आपस में सब लड़ रहे, ना रहा कोई लौह पुरुष जो क्षेत्रवाद फिर मिटा सके। कहे राजपूत राणा हमारे, कहे मराठा शिवाजी हमारे, फिर कौन कहेगा इन दोनों को भारत माँ के पूत दुलारे? माना दोनों ने शान अपने, क्षेत्रों की खूब बढ़ाई थी, पर स्वाभिमान भारत का बचाएँ, यही कसम तो खाई थी! अरे पूर्वजों को देखो अपने, पूर्वजों को देखो अपने, तुम उनकी भांति ना बन सके, ना रहा कोई लौह पुरुष जो क्षेत्रवाद फिर मिटा सके। अनेक प्रांत हैं, अनेक क्षेत्र हैं, सबकी अपनी क्षमता है, भारत माँ के वीर पुत्र सब, सबको मिलती ममता है। जब माँ के सामने पुत्र लड़ें तब माँ का कलेजा रोता है, आपस में फिर ना लड़ें ये, इतना प्रेम तो बनता है। क्षेत्रवाद को छोड़कर हम भारत वासी बन सकें, काम ...

मैं उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ !!

मंजिल भी मैं हूँ, मंजिल की राह भी मैं हूँ,  मैं खुद की खोज के पथ पर हूँ।  क्योंकि मालूम है मुझे मंजिल मेरी, इसीलिए उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ। मुझे प्रसिद्धि की चाहत नहीं, बदनामी का भय नहीं। मुझे प्रसिद्धि की चाहत नहीं,  और बदनामी का भय नहीं। मैं तो उन प्रसिद्ध दीवारों की, बुनियाद का पत्थर हूँ।  क्योंकि मालूम है मुझे मंजिल मेरी, इसीलिए उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ। मुझे रोकेगा कोई, मुझे टोकेगा कोई, मेरे बढ़ते कदमों को पीछे खींचेगा कोई, लेकिन मैं अपनी राह में रुकुँगा नहीं, झुकुंगा नहीं, क्योंकि मैं उस मुकाम को पाने के लिए तत्पर हूँ।  हाँ मालूम है मुझे मंजिल मेरी, और मैं उस पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ। - कृष्णांश  Follow Us On :- Instagram      Facebook      Twitter      LinkedIn हमारी अन्य वेबसाइट :- rashtrawadiitihas.blogspot.com rashtrawadivishay.blogspot.com rashtrawadigeet.blogspot.com

हिंदू भूमि के वासी हैं हम

हिंदू भूमि के वासी हैं हम,  खुद को हिंदू बताओ तुम। जात-पात के भेद में बंटना,  भूल आज से जाओ तुम।। एक होने का समय है, एकता दिखलाओ तुम।। हिंदू भूमि के वासी हैं हम, खुद को हिंदू बताओ तुम।। खुद को हिंदू बताओ तुम...!! मानवता का पाठ पढ़ाया,  समस्त विश्व को मार्ग दिखाया,  संकट भरी राह से हमनें,  सारे जगत को पार लगाया।। अंधियारे की राह में प्यारे, जलती हुई मशाल हो तुम। हिंदू भूमि के वासी हैं हम, खुद को हिंदू बताओ तुम।। खुद को हिंदू बताओ तुम...!! वेदों से विज्ञान है आया,  उपनिषदों में सार बताया, जितने ग्रंथ हुए हैं यहाँ पर,  सबमें जीवन ज्ञान है पाया।। गीता के महाज्ञान से प्यारे, निरंतर बढ़ते जाओ तुम। हिंदू भूमि के वासी हैं हम, खुद को हिंदू बताओ तुम।। खुद को हिंदू बताओ तुम...!! - कृष्णांश Follow Us On :- Instagram      Facebook      Twitter      LinkedIn हमारी अन्य वेबसाइट :- rashtrawadiitihas.blogspot.com rashtrawadivishay.blogspot.com rashtrawadigeet.blogspot.com

अगर हिन्दू राष्ट्र बनाना है तो!

अगर हिन्दू राष्ट्र बनाना है तो, हिन्दुत्व के मार्ग पर चलना सीखो, स्वयं हिन्दुत्व का पाठ पढ़ कर औरों को पाठ पढ़ाना सीखो।। तुम अपने नाम के पीछे जाती लगाकर, खुद को बनिया, ब्राह्मण, जाट और ठाकुर बताते हो, तुम अपने नाम के पीछे जाती लगाकर, खुद को बनिया, ब्राह्मण, जाट और ठाकुर बताते हो, अरे जाती भेद में बंटे हुए तुम, तभी तो पत्थर खाते हो।। जरा नाम के आगे लिख कर सनातनी, जरा नाम के आगे लिख कर सनातनी, स्वयं को हिन्दू बताना सीखो, जाति भेद से ऊपर उठकर, सबको भाई बनाना सीखो।। जाति भेद से ऊपर उठकर, सबको भाई बनाना सीखो।। अगर  हिन्दू राष्ट्र बनाना है ना  तो  हिन्दुत्व के मार्ग पर चलना सीखो।। ना माथे पर तिलक किसी के, ना कोई भगवा धारी है, ना माथे पर तिलक किसी के, ना कोई भगवा धारी है, ना ही मुख पर नाम राम का, सबकी यही बीमारी है।  अरे विदेशी कल्चर को छोड़कर, अपनी सभ्यता अपनाना सीखो  भूल कर अंग्रेजी भाषा को जरा, हिन्दी में बात बताना सीखो।। अगर  हिन्दू राष्ट्र बनाना है ना  तो  हिन्दुत्व के मार्ग पर चलना सीखो, स्वयं हिन्दुत्व का पाठ पढ़ कर औरों को पाठ पढ़ाना सीखो।। अरे अ...