निकल पड़ो भगवा ध्वज लेकर
निकल पड़ो भगवा ध्वज लेकर, हिन्दू राष्ट्र बनाने को, मातृभूमि भारत के कण-कण का कर्जा चुकाने को।। तुम उन वीरों के वंशज हो, जो डरे नहीं तलवारों से, आक्रान्ताओं के साथ साथ, जो लड़ते रहे गद्दारों से। तुम उन वीरों के वंशज हो, जो मरते थे इस मिट्टी पे, मातृभूमि की रक्षा, प्राणों को देकर करते थे।। नाम अपने पूर्वजों का, गौरवमयी बनाने को, निकल पड़ो भगवा ध्वज लेकर, हिन्दू राष्ट्र बनाने को।। ये समय नहीं है बंटने का और मतभेदों में पड़ने का, ये समय नहीं है जात-पात और छुआ-छात को करने का, ये समय नहीं है लालच का, ये समय नहीं है आलस का, ये उचित समय है, संगठन की शक्ति को दिखलाने का, एकता के बल पर सारे शत्रु मार भगाने का। राष्ट्र शक्ति के आगे सारी, विदेशी ताकत झुकाने को, निकल पड़ो भगवा ध्वज लेकर, हिन्दू राष्ट्र बनाने को।। निकल पड़ो भगवा ध्वज लेकर, हिन्दू राष्ट्र बनाने को, मातृभूमि भारत के कण-कण का कर्जा चुकाने को।। निकल पड़ो भगवा ध्वज लेकर, हिन्दू राष्ट्र बनाने को, देवभूमि भारत को फिर से अखंड बनाने को।। निकल पड़ो भगवा ध्वज लेकर, हिन्दू राष्ट्र बनाने को, निकल पड़ो भगवा ध्वज लेकर, हिन्दू राष्ट्र बनाने को...